अजगरा, प्रतापगढ़: पांडवों की प्यास और यक्ष प्रश्नों की ऐतिहासिक धरोहर बचपन में जो कौरव पांडव, अर्जुन युद्धिष्टर की कहानियां पढ़ी बचपन में पढ...
अजगरा, प्रतापगढ़: पांडवों की प्यास और यक्ष प्रश्नों की ऐतिहासिक धरोहर
बचपन में जो कौरव पांडव, अर्जुन युद्धिष्टर की कहानियां पढ़ी
बचपन में पढ़ी गई कौरव-पांडव, अर्जुन और युधिष्ठिर की कहानियां जब असल में देखने को मिलें, तो उस खुशी का अंदाजा सिर्फ वही लगा सकता है जिसने इन ऐतिहासिक स्थलों को अपनी आंखों से देखा हो।
प्रतापगढ़ के अजगरा इलाके में स्थित वह प्राचीन तालाब एक ऐतिहासिक स्थल है, जहां पांडवों के जीवन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रसंग घटित हुआ था। यक्ष प्रश्न, जिसे ‘अक्ष प्रश्न’ भी कहा जाता है, यहीं से जुड़ा हुआ है।
अजगरा तालाब: यक्ष प्रश्न की ऐतिहासिक घटना
जब पांडव अपने वनवास के दौरान अजगरा (प्रतापगढ़) में पहुंचे, तो उन्हें प्यास लगी और वे तालाब की ओर बढ़े। लेकिन तालाब के रक्षक यक्ष ने उन्हें रोका और कहा, "पहले मेरे सवालों के जवाब दो, फिर पानी पी सकते हो।"
पांडवों में सबसे ज्ञानी युधिष्ठिर ने सभी सवालों के जवाब दिए। इनमें से दो महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब आज भी गहरी सीख देते हैं:
यक्ष प्रश्न और युधिष्ठिर के उत्तर
सवाल 1: सबसे सुखी व्यक्ति कौन है?
✅ युधिष्ठिर का उत्तर:
"जिस पुरुष पर कोई कर्ज़ नहीं है, जो अपने वतन में है और जो दिन के पाँचवे या छठे भाग में बैठकर साग-पात भी खा ले, वही सबसे सुखी व्यक्ति है।"
🔹 अर्थ: सच्चा सुख दौलत में नहीं, बल्कि निर्मुक्ति, आत्मसंतोष और अपने लोगों के साथ रहने में है।
सवाल 2: सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?
✅ युधिष्ठिर का उत्तर:
"रोज़-रोज़ प्राणी मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं, लेकिन जीवित लोग यह मानते हैं कि वे हमेशा जीवित रहेंगे। इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है?"
🔹 अर्थ: इंसान मौत को टाल नहीं सकता, फिर भी वह हमेशा अमरता का भ्रम पालता है।
अजगरा में शोध यात्रा और अनुभव
मैंने भी अजगरा तालाब के किनारे पहुंचकर इस ऐतिहासिक घटना को गहराई से महसूस किया और अपनी शोध को आगे बढ़ाया। यह जगह सिर्फ धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व नहीं रखती, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान और दर्शन का खजाना भी है।
निष्कर्ष: इतिहास से क्या सीखें?
- आत्मसंतोष ही असली सुख है।
- जीवन क्षणिक है, इसलिए हर दिन को सार्थक बनाएं।
- ज्ञान, जहां से मिले, उसे अपनाएं।
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