इस में कोई शक नही है कि सदाचार हर समय में महत्वपूर्ण रहा हैं। परन्तु वर्तमान समय में इसका महत्व कुछ अधिक ही बढ़ गया है। क्योँकि वर्तमान समय ...
इस में कोई शक नही है कि सदाचार हर समय में महत्वपूर्ण रहा हैं। परन्तु वर्तमान समय में इसका महत्व कुछ अधिक ही बढ़ गया है। क्योँकि वर्तमान समय में इंसान को भटकाने और बिगाड़ने वाले साधन पूर्व के तमाम ज़मानों से अधिक हैं। पिछले ज़मानों मे बुराईयाँ फैलाने और असदाचारिक विकार पैदा करने के साधन जुटाने के लिए मुश्किलों का सामना करते हुए अधिक मात्रा मे धन खर्च करना पड़ता था। परन्तु आज के इस विकसित युग में यह साधन पूरी दुनिया मे व्याप्त हैं।जो काम पिछले ज़मानों में सीमित मात्रा में किये जाते थे वह आज के युग में असीमित मात्रा में बड़ी आसानी के साथ क्रियान्वित होते हैं। आज एक ओर विकसित हथियारों के द्वारा इंसानों का कत्ले आम किया जा रहा है। तो दूसरी ओर दुष्चारिता को बढ़ावा देने वाली फ़िल्मों को पूरी दुनिया मे प्रसारित किया जा रहा है।विशेषतः इन्टर नेट के द्वारा मानवता के लिए घातक विचारों व भावो को दुनिया के तमाम लोगों तक पहुँचाया जा रहा है।
इस स्थिति में आवश्यक है कि सदाचार की तरफ़ गुज़रे हुए तमाम ज़मानों से अधिक ध्यान दिया जाये।
वास्तव में इंसान को इंसान कहना उसी समय शोभनीय है जब वह इंसानी सदाचार से सुसज्जित हो। सदाचारी न हो ने पर यह इंसान एक खतरनाक नर भक्षी का रूप भी धारण कर लेता है। और चूँकि इंसान के पास अक़्ल जैसी नेअमत भी है अतः इसका भटकना अन्य प्राणीयों से अधिक घातक सिद्ध होता है।और ऐसी स्थिति में वह सब चीज़ों को ध्वस्त करने की फ़िक्र में लग जाता है। और अपने भौतिक सुख और लाभ के लिए युद्ध करके बे गुनाह लोगों का खून बहानें लगता है।
ऐसे में हमको धर्म की ज़रूरत पड़ती है. क्युकि सभी धर्मों में सदाचार पे विशेष रूप से बल दिया है। क़ुरआन में सदाचार को एक आधारिक विषय के रूप में माना गया है। जबकि इस्लाम के दूसरे तमाम क़ानूनों को इस के अन्तर्गत ब्यान किया गया. अल्लाह ने सूरए फ़ुस्सेलत की आयत न.34 मे कहा है कि “तुम बुराई का जवाब अच्छे तरीक़े से दो
अच्छाई और बुराई का ज्ञान,धर्म के ज़रिये ही मुमकिन है. ज्ञान अच्छे सदाचार के लिए कारक है। तथा समस्त सदाचारिक बुराईयाँ अज्ञानता के कारण होती हैं। और ज्ञान बदकार और दुराचारी लोगों को उनकी बदकारी और दुराचार में मदद भी कर सकता है। और वह पहले से बेहतर तरीक़े से अपने बुरे कामों पर बाक़ी रहते हैं।
सही ज्ञान वो है जो अच्छाई और बुराई का फर्क बताए , जो अच्छे सदाचार के लिए कारक बने और यह धर्म के सहारे ही मुमकिन है. इसके लिए पहले अपने धर्म को पहचानो, धार्मिक उपदेशों को पढो, उसपे चलने की कोशिश करो. इसके लिए सहारा लो धार्मिक ग्रंथों का, न की पैसे के लालची मुल्लाओं ,पंडितों और नेताओं के भड़काऊ भाषाडों और फतवों का. जो मुल्ला, पंडित या नेता तुमको दुराचार के सहारे धार्मिक बना ने की बात बताए उसके पीछे चलने से इनकार कर दो. जिस दिन किसी भी मुल्ला को, नेता को, पंडित को धार्मिक किताबों के उपदेशों से, उसके संस्थापको के उपदेशों से पहचान ना हम सीख जाएंगे उसी दिन से हम अपना सही धर्म पहचान ने लगेंगे , और सदाचारी बनेंगे और सही मायेने में इंसान कहलाएंगे.

इस स्थिति में आवश्यक है कि सदाचार की तरफ़ गुज़रे हुए तमाम ज़मानों से अधिक ध्यान दिया जाये।
वास्तव में इंसान को इंसान कहना उसी समय शोभनीय है जब वह इंसानी सदाचार से सुसज्जित हो। सदाचारी न हो ने पर यह इंसान एक खतरनाक नर भक्षी का रूप भी धारण कर लेता है। और चूँकि इंसान के पास अक़्ल जैसी नेअमत भी है अतः इसका भटकना अन्य प्राणीयों से अधिक घातक सिद्ध होता है।और ऐसी स्थिति में वह सब चीज़ों को ध्वस्त करने की फ़िक्र में लग जाता है। और अपने भौतिक सुख और लाभ के लिए युद्ध करके बे गुनाह लोगों का खून बहानें लगता है।
ऐसे में हमको धर्म की ज़रूरत पड़ती है. क्युकि सभी धर्मों में सदाचार पे विशेष रूप से बल दिया है। क़ुरआन में सदाचार को एक आधारिक विषय के रूप में माना गया है। जबकि इस्लाम के दूसरे तमाम क़ानूनों को इस के अन्तर्गत ब्यान किया गया. अल्लाह ने सूरए फ़ुस्सेलत की आयत न.34 मे कहा है कि “तुम बुराई का जवाब अच्छे तरीक़े से दो
अच्छाई और बुराई का ज्ञान,धर्म के ज़रिये ही मुमकिन है. ज्ञान अच्छे सदाचार के लिए कारक है। तथा समस्त सदाचारिक बुराईयाँ अज्ञानता के कारण होती हैं। और ज्ञान बदकार और दुराचारी लोगों को उनकी बदकारी और दुराचार में मदद भी कर सकता है। और वह पहले से बेहतर तरीक़े से अपने बुरे कामों पर बाक़ी रहते हैं।
सही ज्ञान वो है जो अच्छाई और बुराई का फर्क बताए , जो अच्छे सदाचार के लिए कारक बने और यह धर्म के सहारे ही मुमकिन है. इसके लिए पहले अपने धर्म को पहचानो, धार्मिक उपदेशों को पढो, उसपे चलने की कोशिश करो. इसके लिए सहारा लो धार्मिक ग्रंथों का, न की पैसे के लालची मुल्लाओं ,पंडितों और नेताओं के भड़काऊ भाषाडों और फतवों का. जो मुल्ला, पंडित या नेता तुमको दुराचार के सहारे धार्मिक बना ने की बात बताए उसके पीछे चलने से इनकार कर दो. जिस दिन किसी भी मुल्ला को, नेता को, पंडित को धार्मिक किताबों के उपदेशों से, उसके संस्थापको के उपदेशों से पहचान ना हम सीख जाएंगे उसी दिन से हम अपना सही धर्म पहचान ने लगेंगे , और सदाचारी बनेंगे और सही मायेने में इंसान कहलाएंगे.
The Girl with the Dragon TattooThe Girl Who Kicked the Hornet's Nest
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