"मोजो मीडिया" (Mojo Media) मोबाइल जर्नलिज्म (Mobile Journalism) आज की जरूरत। पत्रकारिता के लिए सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से यह रही है...
"मोजो मीडिया" (Mojo Media) मोबाइल जर्नलिज्म (Mobile Journalism) आज की जरूरत।
पत्रकारिता के लिए सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से यह रही है कि खबर को आम लोगों तक जल्द से जल्द कैसे पहुँचाया जाए, और यही कारण है कि सोशल मीडिया के विकास के साथ-साथ मोबाइल पत्रकारिता लोगों की आवश्यकता बन गई है।
एक समय था, लगभग 12 वर्ष पहले, जब मैंने जौनपुर के पत्रकारों को न्यूज़ पोर्टल्स की महत्ता समझाई और उन्हें इसके प्रति जागरूक किया। साथ ही, मैंने उन्हें यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स के महत्व के बारे में भी बताया। उस समय यह काम डेस्कटॉप के जरिए किया जाता था, जो हर पत्रकार के पास उपलब्ध नहीं था। आज, हर पत्रकार अपने स्मार्टफोन के माध्यम से इन न्यूज़ पोर्टल्स और यूट्यूब चैनलों को सफलतापूर्वक संचालित कर रहा है।
सबसे पहले विस्तार में इस मोबाइल पत्रकारिता को समझते हैं।
"मोजो मीडिया" (Mojo Media) आमतौर पर मोबाइल जर्नलिज्म (Mobile Journalism) ko कहते हैं, जो डिजिटल पत्रकारिता का ही एक नया रूप है। इसमें पत्रकार मोबाइल डिवाइस (जैसे स्मार्टफोन, टैबलेट) का उपयोग करके समाचारों की रिकॉर्डिंग, एडिटिंग और प्रसारण करते हैं।
1. मोबाइल-आधारित रिपोर्टिंग: रिपोर्टर स्मार्टफोन से ही वीडियो शूट, एडिट और पब्लिश कर सकते हैं।
2. तेज़ और प्रभावी: कम संसाधनों में, कम समय में रिपोर्टिंग की जा सकती है।
3. सोशल मीडिया फोकस: कंटेंट को फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब आदि पर तुरंत शेयर किया जा सकता है।
4. स्वतंत्र और लचीला: पत्रकारों को बड़े स्टूडियो या भारी उपकरणों की जरूरत नहीं होती।
5. इंटरैक्टिव और एंगेजिंग: लाइव स्ट्रीमिंग, इंस्टेंट अपडेट और ऑडियंस के साथ सीधा संवाद संभव होता है।
भारत में (Mojo) मोबाइल जर्नलिज्म का प्रभाव
भारत में कई स्वतंत्र पत्रकार, यूट्यूबर्स और डिजिटल मीडिया हाउस Mojo Journalism को अपना रहे हैं। यह पारंपरिक मीडिया के मुकाबले अधिक तेज़ और डायनामिक साबित हो रहा है।
आज हर जागरूक पत्रकार मोबाइल पत्रकारिता करता नजर आ रहा है और फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, एडिटिंग, लेखन जैसे सभी काम मोबाइल के जरिए करते हुए दिखाई देता है। आज कोई भी खबर वीडियो, फोटो और लेखन के साथ आम जन तक बहुत तेजी से पहुँच रही है। हालाँकि, मोबाइल पत्रकारिता के नुकसान भी कम नहीं हैं, क्योंकि अब यह चिंता सताने लगी है कि यह कैसे पता किया जाए कि कोई वीडियो या तस्वीर किस तारीख की है या वह संपादित तो नहीं है। इसका समाधान यह है कि अब आम इंसान को भी AI टूल्स की जानकारी रखनी होगी, ताकि वह घर बैठे सही और गलत की पहचान कर सके।
एस एम मासूम
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