हमारा उद्देश्य खुद बड़ा बनना
जीवन का उद्देश्य खुद बड़ा बनना होना चाहिए, : होली की हार्दिक बधाई
अच्छाई बनाम अच्छाई: समाज में सकारात्मक बदलाव की जरूरत
जीवन का उद्देश्य बड़ा बनना होना चाहिए, न कि दूसरों को छोटा बनाना। जब आप खुद को बेहतर बनाते हैं, तो आपके आसपास के लोग स्वतः ही आपकी बराबरी करने का प्रयास करते हैं। एक छोटी रेखा को छोटा करने का सबसे सरल तरीका यह है कि उसके पास एक बड़ी रेखा खींच दी जाए। लेकिन अधिकतर लोग खुद को ऊंचा उठाने की बजाय, दूसरों को छोटा करने की कोशिश में लगे रहते हैं।
अच्छाई और बुराई की जंग: ऐतिहासिक और व्यक्तिगत संघर्ष
हम इतिहास में अच्छाई की बुराई पर जीत के कई उदाहरण देखते हैं, जैसे:
कर्बला में इमाम हुसैन की कुर्बानी और यजीद की जुल्म की जंग
महाभारत में धर्म और अधर्म का युद्ध
होलिका दहन, जिसमें दुराचार का अंत हुआ
लेकिन सबसे बड़ी लड़ाई हमारे अंदर हर दिन चलती है। जब हम कोई गलत काम करते हैं, तो हमारी अंतरात्मा हमें सचेत करती है। अच्छे लोग इस आवाज़ को सुनकर बुराई से बचते हैं, जबकि बुरे लोग इसे अनसुना कर देते हैं, जिससे बुराई की जीत हो जाती है।
अच्छाई बनाम अच्छाई की जंग: क्यों बढ़ रही है यह समस्या?
आजकल अच्छाई की अच्छाई से जंग ज्यादा देखने को मिल रही है। इसके दो प्रमुख कारण हैं:
1. अहम् ("मैं") – लोग यह नहीं चाहते कि कोई और उनसे बेहतर अच्छा काम करे।
2. शोहरत और दौलत की लालसा – अधिकतर लोग अच्छा काम मानवता के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्रसिद्धि और धन-संपत्ति बढ़ाने के लिए करते हैं
इसका फायदा हमेशा बुरे लोगों को मिलता है।
उदाहरण:
अगर आप अपने कंप्यूटर में एक एंटीवायरस रखते हैं और दूसरा इंस्टॉल करने की कोशिश करते हैं, तो दोनों एक-दूसरे को वायरस बताने लगते हैं, क्योंकि कंपनियों को सिर्फ अपना व्यापार बढ़ाना है। इसी तरह, जब लोग अच्छे कार्य मानवता के लिए नहीं, बल्कि स्वार्थ के लिए करते हैं, तो वे दूसरों को आगे बढ़ने नहीं देते। इससे समाज में बुराई को बढ़ावा मिलता है।
सच्ची अच्छाई क्या है?
यदि आप समाज में अच्छा काम कर रहे हैं, तो इसे इर्ष्या और अहम को त्यागकर करें। जब आप मानवता और ईश्वर की खुशी के लिए कार्य करेंगे, तब आप दूसरों की अच्छाई को देखकर खुश होंगे और एक-दूसरे का सहयोग करेंगे।
आजकल कई लोग गलत तरीके से धन कमाकर दान-पुण्य का दिखावा करते हैं, ताकि वे समाज में खुद को अच्छा साबित कर सकें। यह जानना जरूरी हो गया है कि कौन सच्चा सदाचारी है और कौन अपनी छवि सुधारने के लिए अच्छाई का नाटक कर रहा है।
होलिका दहन: बुराई से दूर रहने का संदेश
होली से पहले होलिका दहन हमें यह सिखाता है कि जीवन में दुराचारी का साथ कभी न दें।
हिरण्यकश्यपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को ईश्वर भक्ति छोड़ने के लिए कहा।
प्रह्लाद ने उसकी बात मानने से इंकार कर दिया।
हिरण्यकश्यपु ने प्रह्लाद को होलिका की गोद में बिठाकर आग में जलाने का प्रयास किया।
लेकिन होलिका खुद जल गई, जबकि प्रह्लाद सुरक्षित रहे।
इससे हमें यह सीख मिलती है कि यदि आप बुरे लोगों का समर्थन करेंगे, तो अंततः आप भी उनके साथ नष्ट हो जाएंगे।
निष्कर्ष: अच्छाई की सच्ची पहचान करें
इस होली पर होलिका दहन का वास्तविक अर्थ समझें और यह प्रण करें कि:
✅ हम केवल सच्ची अच्छाई का समर्थन करेंगे।
✅ हम दुराचारियों से दूरी बनाए रखेंगे।
✅ हम समाज में मिलकर सकारात्मक बदलाव लाएंगे।
तभी हम वास्तव में होली की खुशी मनाने के हकदार होंगे। वरना यह केवल एक दिखावा बनकर रह जाएगा।
एस. एम. मासूम
आप सभी को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं.